रामनगर की रामलीला : परिचय

रामनगर की रामलीला : परिचय जहाँ सहजता ही श्रेष्ठता है–

 रामनगर की रामलीला की विश्वप्रसिद्धि के पीछे एक साथ तमाम कारक हैं। लगभग पचीस वर्ग किलोमीटर के प्राकृतिक मंच पर प्रसंगानुसार चलायमान यह मंचन बहुत ही सहजता के साथ बिना ध्वनि विस्तारक यंत्रों के तथा बिजली के बड़े रोशनी करने वाले उपकरणों के स्थान पर पुराने समय के पंचलाइट और मशाल की रोशनी में प्रत्येक दिन न्यूनतम 10 हजार की भीड़ को मात्र रामलीला व्यास के ‘‘चुप रहो! सावधान!’’ स्वर के द्वारा अनुशासित किया जाता है। ये रामलीला की विशिष्टता के कुछ सहज उदाहरण हैं। इसी प्रकार की सहजता इस रामलीला की श्रेष्ठता है और यह सौम्य श्रेष्ठता ही इसकी विश्वप्रसिद्धि का निर्विवाद कारण है। रामनगर की रामलीला में प्रतिदिन आने वाले नेमी, साधु-संतो की समर्पित व अनुशासित टोलियाँ श्रद्धा और समर्पण के बड़े अध्याय हैं।

यहां दर्शक मात्र दर्शक न होकर पात्रों और परिस्थितियों, मंचन व प्रसंग के अनुसार खुद भी रामलीला में भूमिका निभा रहा दिखाई देता है। पात्रों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी समर्पण, नेमी-प्रेमी जनों का श्रद्धा और भक्ति भाव, रामलीला प्रसंगों का मौलिक मंचन, संवाद अदायगी, मंचन में सूक्ष्म तत्वों का भी समावेश; ऐसे अनेकानेक चित्र नये दर्शक के लिए कौतूहल और नेमीजनों के लिए श्रद्धा के सागर हैं। 31 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला में न केवल मंच पर ही अपितु नेपथ्य मंे भी मजबूत भूमिका अदा करने वाले ऐसे तमाम चरित्र हैं जो कई पीढ़ियों से पूरी निष्ठा के साथ संलग्न हैं।

रामनगर की इस विश्वप्रसिद्ध रामलीला में प्रत्यक्ष – परोक्ष रूप से पूर्ण समपर्ण व असीम आस्था के साथ अपनी बहुविध भूमिका निभाने वाले इन लोगों के लिए प्रशंसा, प्रसिद्धि और पारिश्रमिक अर्थहीन वस्तु है। कुल मिलाकर आप जिधर भी नजर डालेंगे रामलीला का प्रत्येक पक्ष, अद्वितीय और अनुपम है। पूर्व में रामलीला पर कुछ लेख और पुस्तकें अवश्य आयी हैं लेकिन अभी भी रामलीला की विशिष्टता को समग्रता के साथ समझने के लिए अपार शोध और लेखन की सम्भावनाएं हैं। इस विश्वप्रसिद्ध रामलीला पर यदि सर्वांगीण पक्षों से प्रकाश डालने का प्रयास किया जाय तो इसके लिए वृहदाकार पुस्तक के कई खण्ड प्रकाशित करने होंगे तो भी शायद यह विश्वप्रसिद्ध श्रीरामलीला लेखन की सीमा में पूर्णतः आबद्ध नहीं की जा सकती।

अन्ततः प्रबुद्ध पाठकों की ओर से उनके सुझावों व प्रतिक्रियाओं की अपेक्षा के साथ प्रस्तुत है यह  वेबसाइट – ‘‘विश्वप्रसिद्ध रामलीला: रामनगर ’’।

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