रामनगर की रामलीला की विश्वप्रसिद्धि के पीछे एक साथ तमाम कारक हैं| लगभग पचीस वर्ग किलोमीटर के प्राकृतिक मंच पर प्रसंगानुसार चलायमान यह मंचन बहुत ही सहजता के साथ बिना ध्वनि विस्तारक यंत्रों के तथा बिजली के बड़े रोशनी करने वाले उपकरणों के स्थान पर पुराने समय के पंचलाइट और मशाल की रोशनी में प्रत्येक दिन न्यूनतम दस हज़ार की भीड़ को मात्र रामलीला व्यास के " चुप रहो! सावधान!" स्वर के द्वारा अनुशासित किया जाता है। ये रामलीला की विशिष्टता के कुछ सहज उदाहरण हैं। इसी प्रकार की सहजता इस रामलीला की श्रेष्ठता है और यह सौम्य श्रेष्ठता ही इसकी विश्वप्रसिद्धि का निर्विवाद कारण है। रामनगर की रामलीला में प्रतिदिन आने वाले नेमी, साधु -संतों की समर्पित व अनुशासित टोलियां श्रद्धा और समर्पण के बड़े अध्य्याय हैं।

रामनगर रामलीला विवरणिका

दिवस 1 – रावण का जन्म, दिग्विजय, क्षीरसागर की झांकी, देव स्तुति,  आकाशवाणी।रामलीला स्थल- रामबाग से पोखरा तक।प्रसंग- बालकाण्ड दोहा संख्या-175-1 से बालकाण्ड- 187-6 तक। दिवस 2 – श्री अवध शृंगीऋषिकृत यज्ञ, अद्भुत झाँकी, श्रीरामजी ...
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रामनगर की रामलीला में पात्र चयन एवं व्यास परम्परा

रामनगर की रामलीला के प्रारम्भ मं दो व्यास की परम्परा नहीं थी। रामलीला के प्रारम्भ में व्यास की गद्दी एक ही थी, दूसरा पद सिंगारिया का होता था। परन्तु श्रीराम पदारथ पाण्डेय, प्रधान व्यास की ...
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रामनगर की रामलीला में रामायणी दल

रामायण पाठ करने वाले रामायणी दल पूरी रामलीला के क्रमबद्ध मंचन के सूत्रधार  रूप में हैं। रामनगर की रामलीला में रामायणी दल की भूमिका श्रीरामलीला अनुष्ठान द्वितीय गणेश पूजन के साथ ही प्रारंभ होती है, ...
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रामनगर का इतिहास

इतिहास लेखन को लेकर विद्वानों में तमाम मतभेद समय पर उभरते रहे हैं कभी तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों की उपेक्षा के रूप में तो कभी उद्गम काल के संदर्भ में संदेह के रूप में। हांलाकि तार्किक ...
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रामलीला में साधु संत एवं नेमीजन

‘पद सरोज पद पायनी, भक्ति सदा सत्संग‘‘ भक्ति और भाव के पारस्परिक सम्बन्ध में य्ाूँ तो दृष्­िटकोंण को सर्वोच्चता प्राप्त है परन्तु निरन्तरता का अभाव कहीं भी, किसी भी प्रारुप में विसंगति के जन्म का ...
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रामलीला के शोधक- काष्ठ जिह्वा स्वामी

रामनगर की रामलीला विश्व भर में काशी की पहचान बन गयी है। इस अद्भुत लीला का मंचन सदियों से आम जनमानस के हृदय में बसा हुआ है। शायद ही ऐसा कोई और मंचन इतना दीर्घजीवी ...
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रामनगर की रामलीला के स्थल

एक मंच पर होने वाले घटना क्रम को नाटक की संज्ञा दी जाती है और रामनगर की रामलीला का मंचन स्थल रामनगर किले से लेकर 4 किमी0 दूर लंका तक फैला हुआ है। जगह-जगह पर ...
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रामलीला से सम्बन्धित तिथियाँ और समय

रामनगर की श्रीरामलीला का शुभारंभ सौर-पंचांग के आधार पर भाद्र पद मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्दशी तिथि को (बहुतायत सितम्बर महीने में) होता है। यह रामलीला आश्विन मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष तक ...
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रामनगर की रामलीला : परम्परा एवं अनुशासन

रामनगर की रामलीला में पारम्परिक रूप से समस्त प्रक्रियाओं को आज दो सौ से अधिक सालों बाद भी यथावत दोहराया जा रहा है तथा इनके पालन में यथोचित सावधानियां भी बरती जाती हैं। रामलीला की ...
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रामनगर, रामलीला का रंगमंचीय पक्ष

(अभिनय] साज-सज्जा एवं संवाद) रामनगर के रामलीला की पात्र योजना उसके संवाद, उसकी मंचीय संकल्पना, उसकी रंगशाला और दृश्य योजना यानी मोटेे तौर पर कहें तो उसकी प्रस्तुति भारतीय रंग परम्परा में एक नया अध्याय ...
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काशीकथा

‘काशीकथा‘ बनारस की संस्कृति एवं विरासत को संजोने एवं इंटरनेट के माध्यम से अधिकाधिक पाठकों/जिज्ञासुओं तक इस प्राचीन नगरी की विशिष्टताओं को प्रेषित करने के पुनीत उदेश्य के साथ शुरू किया जा रहा है। यह एक दीर्घकालिक एवं निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है; जिसमें आप सभी के योगदान की आवश्यकता है। समस्त प्रबुद्धजनों से वेबसाइट की विषयवस्तु के संदर्भ में बौद्धिक एवं व्यावहारिक सहयोग की अपेक्षाओं के साथ -  ( kashikatha@gmail.com पर आपका सहयोग अपेक्षित है। )

काशीकथा / रामलीला तथ्य 

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